सच है के ग़ालिब, जौक, मोमिन, मीर नहीं हूँ मैं.... हाँ, पर खूबसूरत लफ़्ज़ों का भी फ़कीर नहीं हूँ मैं....KK
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वो मेरा होकर भी मुझसे जुदा रहा जब भी मिला बस खफा खफा रहा क्या मौसम आये क्या बादल बरसे कहाँ ख्याल सर्द आहों के सिवा रहा वक़्त ने यूँ म...
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शाम फिर से मुस्कराने लगी उसकी याद जब यूँ आने लगी चराग खुद-ब-खुद ही जल उठे रौशनी उसे ही गुनगुनाने लगी संदली हवा छूके उसके गेसू चली सा...
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ख्यालों में आपका आना जाना रात भर फिर चश्मे--तर का मुस्कुराना रात भर हर इक आहट पे है आपकी आमद लगे मेरा दरवाजे तक नज़रें उठाना रात भर आप...
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जाने कैसा दीवाना हूँ मैं, जाने कैसी वहशत है तेरा इश्क है पागलपन है, या ये मेरी आदत है गुल में तेरा चेहरा देखूं, झील ये आँखें लगती हैं हर श...
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हर इक चेहरे में तेरा चेहरा लगे है हिज्र में मुझको सब सेहरा लगे है मेरी हर सदा नाकाम लौट आयी मुझे तो ये खुदा भी बहरा लगे है जाग उठा हू...
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शब् के जख्मों को कुछ सहलाना चाहिए जो शाम बिखरे तो चराग जलाना चाहिए नाम इश्क की जमात में लिखवा दिया है फिर मौसमे-दर्द में भी मुस्कराना च...
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जगती आँखों का ख्वाब ग़ज़ल देखो लगती कैसी बेताब ग़ज़ल उसको मैं क्या नाम दूँ आखिर मुझसे कहती माहताब ग़ज़ल किसी शाम जब याद यूँ आती फिर ह...
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आ जाओ कभी तो दिल को चैन-ओ-करार हो जाए आँखों का मुद्दत से चल रहा ख़त्म इंतज़ार हो जाए भटक रहा हूँ जाने किसकी तलाश में दश्त-ब-दश्त तुमसे म...
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मेरे दिल में हैं कितने गम दोस्तों अब सुनाये तुम्हे क्या हम दोस्तों यूँ तो बरसीं शहर में बरसातें बहुत तश्नगी फिर भी हुई ना कम दोस्तों ...
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हमारे सर पे भी एक आसमान रहता है दुआओं सा जो कोई निगहेबान रहता है तुम नमाज़ी हो तो क्या समझोगे कभी खुदा काफिरों पे कहाँ मेहरबान रहता है...